सिक्किम में तीस्ता नदी में आई बाढ़ का पानी कम हो गया है लेकिन यह अपने साथ तबाही के निशान छोड़ गया है। इस तबाही में कई लोगों की जान चली गई और मकान-दुकान तबाह हो गए। बड़ी संख्या में लोग अभी भी विभिन्न इलाकों में फंसे हुए हैं। सिलिगुड़ी के मातिगारा में रहने वाली मिष्टी हलदर जब बुधवार की सुबह सोकर उठी तो उसने देखा कि तीस्ता नदी उसके घर के आंगन के पास से बह रही है। आमतौर पर यह नदी मिष्टी के घर से ढाई सौ मीटर की दूरी पर बहती है। नदी के पानी के साथ जानवरों के शव और घरों के सामान भी बह रहे थे। 
बाढ़ प्रभावितों ने सुनाई दास्तां
मिष्टी हलदर ने बताया कि नदी बारिश और बाढ़ के चलते उफान पर आ गई और इसके तेज बहाव में कई मकान, सेना और पर्यटकों के कैंप तबाह हो गए। मिष्टी ने बताया कि पुलिस ने उन्हें और उनके आसपास रहने वाले लोगों को नजदीक के आश्रय स्थल पहुंचाया और सबकुछ इतना जल्दी हुआ कि वह सिर्फ एक सूटकेस अपने साथ ले जा सके। महिला ने बताया कि वह सभी प्रार्थना कर रहे थे कि उनके घर बच जाएं। गुरुवार को नदी का जलस्तर कम हुआ तो लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली। हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में लोग आश्रय स्थलों में फंसे हैं। 


पर्यटक सिक्किम में फंसे
पर्यटकों का एक समूह कोलकाता से मोटसाइकिल ट्रैकिंग कर सिक्किम के सिंगतेम पहुंचा था लेकिन बाढ़ के चलते नेशनल हाइवे 10 के बह जाने से वह सिक्किम में ही फंस गए हैं। एक मजदूर रमाकांत यादव समेत कई लोग सिक्किम रेलवे स्टेशन पर फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि वह जिस ठेकेदार के सहारे सिक्किम पहुंचे थे, वह भी मदद नहीं कर पा रहा है क्योंकि खुद उसका घर बाढ़ में तबाह हो गया है। मजदूरों ने बताया कि अब उनके पास पैसे भी नहीं बचे हैं और अगर जल्द ही कुछ मदद नहीं मिली तो उन्हें बिना काम के ही वापस लौटना पड़ेगा।