पूर्णिमा स्नान के बाद भगवान 15 दिन तक एकांतवास में रहते हैं। रविवार को पूर्णिमा उत्सव के अवसर पर सुबह जल्दी प्रतिमाओं को गर्भगृह से बाहर लाकर स्नान मंडप में नहलाया गया। पंचामृत से देव स्नान कराने के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए। शाम को श्रंगार के बाद वे 15 दिन के लिए एकांतवास में चले गए। अमावस्या तक उनके पूर्ण स्वस्थ होने के बाद भक्त उनका दर्शन कर सकेंगे। 18 जून को नेत्र उत्सव मनाया जाएगा।
ओडिसा के पुरोहित भगवान का श्रृंगार करेंगे। 19 को भगवान नव यौवन दर्शन देंगे व 20 जून को धूमधाम से रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर ले जाया जाएगा। 9 दिनों तक वहां विश्राम के बाद धूमधाम से उनकी वापसी होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ स्वामी ज्येष्ठ पूर्णिमा से बीमार पड़ गए हैं। इस दौरान उन्हें रोजाना जड़ी-बुटी से निर्मित काढ़ा दिया जाएगा। भक्तजन व साधु संत सभी उनकी सेवा में लगे हुए हैं।
श्री जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष नारायण नाहक, पूर्व अध्यक्ष बाबूराम प्रधान ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 108 कलश दूध, दही, घी से बने पंचामृत, गंगाजल व नदी के जल से भगवान को देव स्नान कराया गया इसके बाद वे अस्वस्थ हो गए हैं। जड़ी बूटियों से निर्मित काढ़ा पिलाकर उनका इलाज सांकेतिक तौर पर किया जा रहा है। 15 दिन बाद वे स्वस्थ होंगे इसके एक दिन बाद 20 जून को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। पुरुषोत्तम पुरी महाराज, सत्यानन्द पुरी महाराज की देखरेख में उपचार चल रहा है।
औषधि पीने से भगवान स्वस्थ होंगे तब रथयात्रा से एक दिन पहले 19 जुलाई को पट खोला जाएगा। परंपरा के अनुसार भगवान अगले 15 दिनों तक ज्वर से पीड़ित रहेंगे। फिलहाल वैद्य से उनका इलाज चल रहा है और इस समय लोग, इलायची, काली मिर्च व मुलैठी का काढ़ा तैयार करके भगवान को उसका सेवन करा रहे हैं। मंदिर में शंख, घंटा, घड़ियाल, सभी वाद्य यंत्र भी प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।



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